रविवार, 13 अक्तूबर 2013

हो रे सुवना तिरिया जनम अइसे आगे,,,



का पुरबल के भाग जागे,
हो रे सुवना तिरिया जनम अइसे आगे।

छोर के छंदना अइसे छुटगे,
मया के बंधना बंधागे।
मंगनी मया अतेक चिन्हौर,
मइके पराया लागे।

संग संगवारी अबिरथा होगे,
ननपन दूवारी दूरिहागे।
धन तिरिया के भाग रे,
परके पर घर आगे।

जस अपजस बिघना बियाकुल,
लुगा के अचरा लपटागे।
तिरिया के पिरिया हाय,
तौनो मा किरिया समागे।

लाज लहर पीये मतौना,
ऐहंवाती मांग मंतागे।
खोपा के गजरा आंखी के कजरा,
घुंघट उठत ठगागे।

चाल चले माया चकरी,
तिरिया जनम तिरयागे।
दूख सकेले सुख बगराये,
तोर भाग पीरा हमागे।

कुंवारी काया मइके नंदागे,
ससुरे के दिन भगागे।
सैंया बैंहा छूटगे तह ले,
खटिया गोरसी नोहरागे।

अइसे के बेरिया कोन पुछैया,
तिरिया जनम तिरिया गे।
ताना ठोसरा म जिनगी खपगे,
रोवत गावत पहागे।

हो रे सुवना तिरिया जनम अइसे आगे,,,



(फोटो: 'छत्तीसगढ़ी गीत संगी' से लिया गया है। इसके लिये राजेन्द्र चन्द्राकर जी का आभार।)

गीतकार- श्री एमन दास मानिकपुरी
सम्पर्क : औरी, भिलाई-3 दुर्ग छत्तीसगढ़ ।
मोबाईल : 78289 53811  



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