रविवार, 1 मई 2016

रंगकर्मी 'शिवदास घोडके' देंगे नाटकों का प्रशिक्षण

व्यक्तित्व की पूर्णता के लिए थियेटर का ज्ञान आवश्यक है। जीवन एक रंगमंच है जिसमें हम सभी अलग-अलग समय में आते हैं, अपना-अपना किरदार निभाते हैं और फिर चले जाते हैं। प्रत्येक रिश्ते में हम अलग-अलग भूमिकाओं में होते हैं और इसमें नाटकीयता भी होती है। नाटकीयता जीवन के नीरस प्रसंगों को भी रोचक बना देती हैं। प्यार में, गुस्से में हमारी भाव भंगिमा बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। इसी तरह स्वर को कभी कोमल, कभी कर्कष बनाकर हम अपने शब्दों का वजन बढ़ा सकते हैं। यही सबकुछ थिएटर है। थिएटर आपको सिखाता है कि कैसे आप खुलकर हंस सकते हैं, रो सकते हैं। शिवदास घोडके रंगमंच के उसी संसार से हैं जहां भाव-भंगिमाएं और स्वर की साधना की जाती है। वे अपना अनुभव पूरे देश में बांटते फिरते हैं। हम सबके लिए सौभाग्य की बात है 5 मई से 20 तक वे रायपुर में रहेंगे। शिवम एजुकेशनल एकेडमी रायपुरा में बच्चों को नाट्यकला का प्रशिक्षण देंगे। उनके निर्देशन में बच्चे अपने व्यक्तित्व को उभारने का प्रयास करेंगे, निखारेंगे। उनका मानना है कि रंगमंच आपको न केवल अपने भावों को अभिव्यक्त करना सिखाता है बल्कि उन्हें नियंत्रण में रखना भी सिखाता हैं। जीवन में सफल होने, रिश्तों को बनाए या बचाए रखने के लिए भावों पर नियंत्रण बहुत जरुरी है।
श्री घोडके जी का रंगमंच के प्रति झुकाव बचपन से ही रहा है पर उन्हें पहला मौका मिला हाईस्कूल में। इसके बाद वे पहुंचे आज के तेलंगाना की सीमा पर स्थित डेगलूर कालेज। यहां श्रमदान के बदले में शिक्षा लाभ करने की सुविधा थी। वे फोटोग्राफी सीखते रहे, फिल्में डेवलप करते रहे, प्रिंट्स बनाते रहे और पढ़ाई भी करते रहे। काम के ऐवज में यहां भोजन फ्री था। उच्चारण की शुद्धता और साफ आवाज के कारण उन्हें नाटकों में प्राम्प्ट करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। प्राम्प्ट करने वाला व्यक्ति स्क्रिप्ट लेकर सेट पर मौजूद होता है और अभिनय करने वालों को डायलाग याद दिलाने में मदद करता है। संयोग से नाटक का एक महत्वपूर्ण किरदार अवकाश पर घर गया और उसे लौटने में काफी समय लग गया। इधर नाटक का मंचन होना था। नया कलाकार लेने के लिए पर्याप्त समय नहीं था। ऐसे में उन्हें ही वह पार्ट सौंपा गया। प्राम्पटर होने के कारण वे न केवल दृश्यों से परिचित थे बल्कि डायलाग्स भी याद थे। बस वे रंगमंच पर आ गए। इस नाटक में उनके अभिनय को सराहा गया।
इसके बाद शुरू हो गई उनकी रंगमंच की यात्रा। 1978 में उन्होंने नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा में दाखिला ले लिया। इसके बाद एक साल की फेलोशिप भी मिल गई। उन्होंने खुद को रंगमंच को समर्पित कर दिया। आज वे अपने अनुभव और ज्ञान का पिटारा लिए उन लोगों की मदद करने का अभियान चला रहे हैं जिन्सें समाज विकलांग कहता है। वे ड्रामा का इस्तेमाल एक थेरेपी की तरह करते हैैं। वे श्रवण बाधित, दृष्टि बाधित, मानसिक कमजोरी के शिकार बच्चों के साथ काम करते हैं। वे कहते हैं कि ऐसे बच्चे भाव प्रधान होते हैं। वे अपने भावों की अभिव्यक्ति हाव-भाव से ही करते हैं। इस विधा को सशक्त बनाना, जितना उनके लिए जरूरी है, काम का है, उतना किसी और के लिए नहीं। इसलिए उन्होंने कार्य का यह क्षेत्र चुना। रंगमंच ने उन्हें बहुत कुछ दिया है, अब वे इसी तरह गुरुऋण से उऋण हो रहे हैं।
श्री घोड़गे को यहां लाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे है शिवम एजुकेशनल एकेडमी सत्यम विहार रायपुरा और 'आर्ट हलचल' की पल्लवी शिल्पी जो नाटक और फिल्म निर्माण से जुड़े हैं और रंगमंच के प्रति पूर्णत: समर्पित हैं।

शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016

थियेटर, रंगकर्म व लघु सिनेमा निर्माण में इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए

शिवम एजुकेशनल एकेडमी रायपुरा व आर्ट हलचल (थियेटर व लघु फिल्म निर्माण ग्रुप) के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष के समर कैंप का विशिष्ट आकर्षण ‘‘अभिव्यक्ति - थियेटर एवं शार्ट फिल्म मेकिंग’’ रहेगा। यह वर्कशाॅप 5 मई से 20 मई तक चलेगा जिसमें प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में श्री शिवदास घोड़गे, नेशनल स्कुल आॅफ ड्रामा एल्यूम्नी, विख्यात रंगकर्मी मुंबई, पूरे सत्र में अपनी सेवाएं प्रदत्त करेंगे। थियेटर, रंगकर्म व लघु सिनेमा निर्माण में इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है, जिसमें शामिल होकर वे अपनी प्रतिभा निखार सकते है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को लेकर एक लघु फिल्म व नाटक का निर्माण किया जाएगा जिसका मंचन व प्रदर्शन सत्रांत में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में मुक्ताकाश, संस्कृति विभाग में किया जाएगा। यह वर्कशाॅप 10 से 18 वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए ही लागू होगू होगा। इस अवसर का लाभ उठाएं।

समर कैंप का विशिष्ट आकर्षण ‘‘अभिव्यक्ति - थियेटर एवं शार्ट फिल्म मेकिंग’’

विख्यात रंगकर्मी शिवदास घोड़गे देंगे रायपुर में नाटकों का प्रशिक्षण
(शिवम एजुकेशनल एकेडमी एवं आर्ट हलचल थियेटर एवं लघु फिल्म निर्माण गु्रप के संयुक्त तत्वावधान में समर कैंप का आयोजन) 

शिवम एजुकेशनल एकेडमी रायपुरा व आर्ट हलचल (थियेटर व लघु फिल्म निर्माण ग्रुप) के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष के समर कैंप का विशिष्ट आकर्षण ‘‘अभिव्यक्ति - थियेटर एवं शार्ट फिल्म मेकिंग’’ रहेगा। यह वर्कशाॅप 5 मई से 20 मई तक चलेगा जिसमें प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में श्री शिवदास घोड़गे, नेशनल स्कुल आॅफ ड्रामा एल्यूम्नी, विख्यात रंगकर्मी मुंबई, पूरे सत्र में अपनी सेवाएं प्रदत्त करेंगे। थियेटर, रंगकर्म व लघु सिनेमा निर्माण में इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है, जिसमें शामिल होकर वे अपनी प्रतिभा निखार सकते है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को लेकर एक लघु फिल्म व नाटक का निर्माण किया जाएगा जिसका मंचन व प्रदर्शन सत्रांत में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में मुक्ताकाश, संस्कृति विभाग में किया जाएगा। यह वर्कशाॅप 10 से 18 वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए ही लागू होगू होगा। इस अवसर का लाभ उठाएं।

विख्यात रंगकर्मी शिवदास (मुंबई)घोड़गे देंगे रायपुर में नाटकों का प्रशिक्षण

विख्यात रंगकर्मी शिवदास घोड़गे देंगे रायपुर में नाटकों का प्रशिक्षण
(शिवम एजुकेशनल एकेडमी एवं आर्ट हलचल थियेटर एवं लघु फिल्म निर्माण गु्रप के संयुक्त तत्वावधान में समर कैंप का आयोजन)
शिवम एजुकेशनल एकेडमी रायपुरा व आर्ट हलचल (थियेटर व लघु फिल्म निर्माण ग्रुप) के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष के समर कैंप का विशिष्ट आकर्षण ‘‘अभिव्यक्ति - थियेटर एवं शार्ट फिल्म मेकिंग’’ रहेगा। यह वर्कशाॅप 5 मई से 20 मई तक चलेगा जिसमें प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में श्री शिवदास घोड़गे, नेशनल स्कुल आॅफ ड्रामा एल्यूम्नी, विख्यात रंगकर्मी मुंबई, पूरे सत्र में अपनी सेवाएं प्रदत्त करेंगे। थियेटर, रंगकर्म व लघु सिनेमा निर्माण में इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है, जिसमें शामिल होकर वे अपनी प्रतिभा निखार सकते है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को लेकर एक लघु फिल्म व नाटक का निर्माण किया जाएगा जिसका मंचन व प्रदर्शन सत्रांत में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में मुक्ताकाश, संस्कृति विभाग में किया जाएगा। यह वर्कशाॅप 10 से 18 वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए ही लागू होगू होगा। इस अवसर का लाभ उठाएं।

विख्यात रंगकर्मी मुंबई शिवदास घोड़गे देंगे रायपुर में नाटकों का प्रशिक्षण

विख्यात रंगकर्मी शिवदास घोड़गे देंगे रायपुर में नाटकों का प्रशिक्षण
(शिवम एजुकेशनल एकेडमी एवं आर्ट हलचल थियेटर एवं लघु फिल्म निर्माण गु्रप के संयुक्त तत्वावधान में समर कैंप का आयोजन)
शिवम एजुकेशनल एकेडमी रायपुरा व आर्ट हलचल (थियेटर व लघु फिल्म निर्माण ग्रुप) के संयुक्त प्रयास से इस वर्ष के समर कैंप का विशिष्ट आकर्षण ‘‘अभिव्यक्ति - थियेटर एवं शार्ट फिल्म मेकिंग’’ रहेगा। यह वर्कशाॅप 5 मई से 20 मई तक चलेगा जिसमें प्रमुख प्रशिक्षक के रूप में श्री शिवदास घोड़गे, नेशनल स्कुल आॅफ ड्रामा एल्यूम्नी, विख्यात रंगकर्मी मुंबई, पूरे सत्र में अपनी सेवाएं प्रदत्त करेंगे। थियेटर, रंगकर्म व लघु सिनेमा निर्माण में इच्छुक छात्र-छात्राओं के लिए यह एक स्वर्णिम अवसर है, जिसमें शामिल होकर वे अपनी प्रतिभा निखार सकते है। प्रशिक्षण सत्र के दौरान प्रशिक्षणार्थियों को लेकर एक लघु फिल्म व नाटक का निर्माण किया जाएगा जिसका मंचन व प्रदर्शन सत्रांत में गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में मुक्ताकाश, संस्कृति विभाग में किया जाएगा। यह वर्कशाॅप 10 से 18 वर्ष के छात्र-छात्राओं के लिए ही लागू होगू होगा। इस अवसर का लाभ उठाएं।

गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

डोंगरी म करिया

बंदन के चंदन कनेर के फुल,
गुलैची के माला टोटा तरी झुल।

पर के भोभस बर बलिदान होगेंव,
हांसी होगे मोर मय चंडाल होगेंव।

मौत मयारूक मय मौत के दीवाना,
मौत मंजिल बर बिरथा हे बौराना।

पर खातिर जिये मरे उही जुझारू,
बिन खोजे दरस देहे तौने मयारू।

हिरदे के भितरी म कुलुम अंधियार,
कलप कलप खोजेंव देखेंव दिया बार।

अंतस म ठाह पायेंव बगरे अंजोर,
चुहत आंसू दरस पायेंव दुनों कर जोर।

बिन पानी तरिया सुरूज न चंदा,
भरम न भुत उंहा सुखे सुख म बंदा।

तैसे देस मोर जिहा ले मय आयेंव,
कबीर परेमी कबीर गीत गायेंव।

टारे नई टरे बाबू करम गति भारी,
छुट जाही दाग कभू आही मोरो पारी।

गीतकार 
एमन दास मानिकपुरी 'अंजोर'
औंरी, भिलाई—3, जिला—दुरूग
मो.7828953811

शनिवार, 5 दिसंबर 2015

'गीत गंगा'

आरा—पारा खोज परेंव, खोजेंव बखरी बारी।
परछी परछो लेहेंव, आरो अंगना दूवारी।।
हांका पार के कहत हंव गउंकी संगवारी,
मनखे सिरागे का का का?
मनखे सिरागे का?

रांव रांव सबो कोतिल, रांव रांव दिखथे।
खांव खांव सबो डहर ले, खांव खांव दिखथे।।
बिगड़े ईमान बाड़गे अइताचारी,
हकदार सिरागे इहां, होवथे हिस्सादारी,
हांका पार के कहत हंव गउकी संगवारी।

भसकगे हे परदा येद, कोन ओइलत हे।
सेर तराजू बिन बाट, लहू तउलत हे।
पर ल काला कहिबे, घर म होवथे झिंकातानी,
हांका पार के कहत हंव गउकी संगवारी।


यहा अंकाल ये साल, करजा कब छुटाही।
खेती भरोसा जीनगी, भलुक कइसे पहाही।
चिंता फिकर छागे, मारथे तुतारी,
हांका पार के कहत हंव सुनतो संगवारी।

अइसे बिगड़े हाल म, चाल ल जतन लेतेन।
चल दूनों परानी गउ, उही ल सुमर लेतेन।
अउ नै मिलै माउका, हवय ठउका करारी,
हांका पार के कहत हंव सुन लेते संगवारी।

गीतकार
एमन दास मानिकपुरी
औंरी, भिलाई 3 तहसील—पाटन
जिला—दुरूग
मो.7828953811